आचार्य के.एल. विश्वकर्मा एक ऐसे व्यक्तित्व हैं जो भारतीय पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के संरक्षण, प्रचार और नवाचार में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। वे IMPA (Indian Medicine Practitioners Association) संस्था के संस्थापक हैं, जो योग, आयुर्वेद और होम्योपैथी के क्षेत्र में कार्यरत है। IMPA एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जो इन प्राचीन विज्ञानों को आधुनिक संदर्भ में जीवंत बनाता है, जहां चिकित्सकों, शिक्षकों और उत्साही लोगों को एक साथ लाकर स्वास्थ्य और कल्याण की दिशा में कार्य किया जाता है। आचार्य विश्वकर्मा का जन्म और पालन-पोषण एक ऐसे परिवार में हुआ जहां आयुर्वेद की जड़ें गहरी थीं, जिसने उन्हें इन क्षेत्रों में गहन रुचि विकसित करने के लिए प्रेरित किया।

उनकी यात्रा एक साधारण छात्र से एक प्रख्यात आचार्य तक की है, जहां उन्होंने न केवल ज्ञान अर्जित किया बल्कि इसे समाज तक पहुंचाने के लिए संस्थागत ढांचा भी तैयार किया।
IMPA संस्था की स्थापना आचार्य विश्वकर्मा के दूरदर्शी दृष्टिकोण का परिणाम है। यह संस्था योग, आयुर्वेद और होम्योपैथी के एकीकरण पर जोर देती है, जहां इन तीनों प्रणालियों को एक साथ जोड़कर समग्र स्वास्थ्य समाधान प्रदान किए जाते हैं। योग को वे शारीरिक और मानसिक संतुलन का आधार मानते हैं, जबकि आयुर्वेद को प्रकृति-आधारित चिकित्सा और होम्योपैथी को सूक्ष्म उपचार की विधि। IMPA के तहत वे विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करते हैं, जैसे वर्कशॉप, सेमिनार और ट्रेनिंग सेशन, जो युवा पीढ़ी को इन प्राचीन विज्ञानों से जोड़ते हैं। उनकी संस्था ने हजारों लोगों को प्रशिक्षित किया है, जो अब देश-विदेश में इन क्षेत्रों में योगदान दे रहे हैं।

और साथ ही bcoi आरोग्य मैजिक को भी अपनी अमूल्य सेवाएं दे रहे हैं जिसमे कंस थाली थैरेपी मशीन की गुणवत्ता और कांस्य थाली फुट मसाज मशीन की थैरेपी पर क्लासेस भी देते हैं आचार्य विश्वकर्मा का मानना है कि आधुनिक जीवनशैली में तनाव, प्रदूषण और असंतुलित आहार के कारण होने वाली बीमारियों का समाधान इन पारंपरिक विधियों में छिपा है।
आचार्य विश्वकर्मा की विशेषज्ञता पंचकर्म में विशेष रूप से उल्लेखनीय है। पंचकर्म आयुर्वेद की एक प्रमुख शाखा है, जो शरीर को detoxification के माध्यम से स्वस्थ बनाती है। वे विशेष रूप से पदभयंग (Padabhyanga) चैप्टर पर क्लासेस देते हैं, जो पैरों की मालिश पर आधारित है। पदभयंग न केवल शारीरिक थकान दूर करता है बल्कि पूरे शरीर के रक्त संचार को बेहतर बनाता है, नींद में सुधार करता है और तनाव कम करता है। उनकी क्लासेस व्यावहारिक और सैद्धांतिक दोनों होती हैं, जहां छात्रों को आयुर्वेदिक तेलों, तकनीकों और लाभों के बारे में विस्तार से बताया जाता है।

ये क्लासेस ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों मोड में उपलब्ध हैं, जिससे दुनिया भर के लोग लाभान्वित हो रहे हैं। आचार्य जी की शिक्षण शैली सरल और प्रभावी है, जो प्राचीन ग्रंथों जैसे चरक संहिता और सुश्रुत संहिता से उदाहरण लेकर आधुनिक उदाहरणों से जोड़ती है।
इसके अलावा, आचार्य विश्वकर्मा नवाचार के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। वे आयुर्वेद पर आधारित कांसा थाली थेरेपी मशीन के मैन्युफैक्चरर और विक्रेता हैं। कांसा (कांस्य) एक प्राचीन धातु है, जो आयुर्वेद में चिकित्सीय गुणों के लिए जानी जाती है। यह मशीन कांसा थाली का उपयोग करके थेरेपी प्रदान करती है, जो त्वचा की मालिश, detoxification और रक्त प्रवाह सुधारने में सहायक है।
यह मशीन घरेलू उपयोग के लिए डिजाइन की गई है, जो पारंपरिक थेरेपी को सरल बनाती है। आचार्य जी स्वयं इस मशीन के डिजाइन में शामिल रहे हैं, जहां उन्होंने आयुर्वेदिक सिद्धांतों को आधुनिक तकनीक से जोड़ा है। यह उत्पाद IMPA के माध्यम से उपलब्ध है और स्वास्थ्य उत्साही लोगों के बीच लोकप्रिय हो रहा है। वे सुनिश्चित करते हैं कि मशीन की गुणवत्ता उच्चतम हो, और इसमें उपयोग की जाने वाली सामग्री शुद्ध हो।

आचार्य विश्वकर्मा आयुर्वेद और होम्योपैथी में दवाओं की तैयारी में भी माहिर हैं। वे प्राकृतिक जड़ी-बूटियों, खनिजों और होम्योपैथिक तत्वों का उपयोग करके दवाएं तैयार करते हैं, जो विभिन्न रोगों जैसे पाचन विकार, जोड़ों का दर्द, त्वचा समस्याएं और मानसिक स्वास्थ्य मुद्दों के लिए प्रभावी हैं। और वे खुद इनकी फॉर्मुलेशन पर काम करते हैं। उनका उद्देश्य रासायनिक दवाओं के विकल्प के रूप में प्राकृतिक उपचार प्रदान करना है, जो साइड इफेक्ट्स से मुक्त हों। आचार्य के.एल. विश्वकर्मा का योगदान भारतीय चिकित्सा प्रणालियों को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने में महत्वपूर्ण है। IMPA के माध्यम से वे न केवल शिक्षा और उत्पाद प्रदान कर रहे हैं बल्कि एक आंदोलन चला रहे हैं, जो स्वास्थ्य को समग्र दृष्टि से देखता है। उनकी क्लासेस, मशीन और दवाएं लाखों लोगों के जीवन को छू रही हैं। भविष्य में वे IMPA को और विस्तार देकर अधिक लोगों तक पहुंचाने की योजना बना रहे हैं। आचार्य विश्वकर्मा एक प्रेरणा स्रोत हैं, जो साबित करते हैं कि प्राचीन ज्ञान आधुनिक दुनिया में भी प्रासंगिक है।
